शूटआउट एट विएनावाला
दुनिया में करोड़ों लोग यूं ही फुटबॉल के दीवाने नहीं हो गए हैं। खिलाड़ी इसके लिए जीते हैं और मरते हैं। आंसू बहाते हैं और सीना फुलाते हैं। जो हारते हैं उन्हें ४० हजार लोगों से भरे खचाखच स्टेडियम में रोने में कतई शर्म नहीं आती क्योंकि वे जानते हैं कि ...
Ravindra Vyas द्वारा 23 जून, 2008 10:46:00 AM IST पर पोस्टेड
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शूटआउट एट विएनावाला
दुनिया में करोड़ों लोग यूं ही फुटबॉल के दीवाने नहीं हो गए हैं। खिलाड़ी इसके लिए जीते हैं और मरते हैं। आंसू बहाते हैं और सीना फुलाते हैं। जो हारते हैं उन्हें ४० हजार लोगों से भरे खचाखच स्टेडियम में रोने में कतई शर्म नहीं आती क्योंकि वे जानते हैं कि ...
Ravindra Vyas द्वारा 23 जून, 2008 10:46:00 AM IST पर पोस्टेड
तुम्हारी हथेलियों पर
चंद्रकांत देवतालेजी की एक और कविता, आप सबके लिए। यह कविता उनके जल्द ही प्रकाशित होने वाले कविता संग्रह में संग्रहित है। तुम्हारी हथेलियों पर बरसों से दुखने का अभिनय करते मेरे कंधों और पीठ को सहलाती तुम्हारी हथेलियों पर मैंने क्या रखा? अगर इस तरह ...
Ravindra Vyas द्वारा 19 जून, 2008 2:17:00 PM IST पर पोस्टेड
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उम्मीद की शक्ल के पीछे छिपी हुई एक और शक्ल
समय चुपचाप करवट लेकर उनकी अभी अभी आई झुर्री में छिप गया है। वहां न धूप है, न छाया। आंधी में उड़ चुके हरेपन की हलकी रगड़ बाकी रह गई है।
Ravindra Vyas द्वारा 2 जून, 2008 4:23:00 PM IST पर पोस्टेड
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