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अप्रैल 2008


ब्लॉग्स (9)
मैं आशुतोष की कविताओं पर शुरुआत से ही फिदा रहा हूं। इसलिए नहीं कि वह दोस्त है बल्कि इसलिए कि हिंदी की ढेर औसत दर्जे की कविताअों के बीच उसकी कविताएं यह गहरी आश्वस्ति देती हैं कि अच्छे कवियों का पुनर्जन्म होता रहता है। उसकी कविताएं गहरे अवसाद के रेशों से बने और बुने गए झीने पर्दे की कविताएं हैं जिसमें करूणा का जल एक अोझल होती नदी की तरह दूर से झिममिलाता रहता है। आगे पढ़ें...

यह समझना मुश्किल कि इतनी जबरदस्त रचनात्मक ऊर्जा एक ऐसी लड़की में कैसे है जो बालों का रंग हर रोज बदलती रहती है, कल काला, आज लाल और फिर कल हरा। आगे पढ़ें...

बहुत दिनों बाद अपनी पुरानी पुस्तकों और पत्रिकाअों को टटोल रहा था तो हाथ लगा कवि-आलोचक अशोक वाजपेयी द्वारा संपादित पूर्वग्रह का वह खास अंक जो कवियों के गद्य पर एकाग्र है। इसमें आखिर में मेरे प्रिय कवि केदारनाथ सिंह का एक उम्दा गद्य प्रकाशित है- एक स्तम्भ का अकेलापन। पूर्वग्रह के प्रति आभार मानते हुए इसे पढ़िए और कवि के गद्य का आनंद लीजिए। इसमें पकती हुई जमीन की खुशबू मिलेगी। आगे पढ़ें...

मैं एक बार फिर शकीरा की ओर लौटा हूं। ३१ साल की जवानी में उसका जलवा इतना जानदार है कि वह जब थिरकती है तो लगता है एक कौंध मचलती-उछलती नाच रही है। उसकी थिरकन में बदन की बल खाती बिजलियां एक लपट की तरह आपको लपकने की कोशिश करती लगती हैं। उसका नाच एक अंतहीन आंच का आगोश है। उसकी आवाज आबशार की तरह आपको ठंडी राहत देती है तो कभी अंगारे की आंच का अहसास भी कराती है। आगे पढ़ें...

पिछले दिनों पाकिस्तान के नामवर शायर जीशान साहिल गुजर गए। अलग तरह के लबो-लहजे में शायरी करने वाले इस शायर को कराची पर लिखी उसकी नज्मों ने हर सू मशहूर कर दिया। तब उसकी उन नज्मों पर भी लोगों की नजर पड़ी, जिनसे हम-आपके सरोकार भी जुड़े हैं। आगे पढ़ें...

हमने स्त्रियों का अजीब हाल कर रखा है। हम चाहते हैं सुंदर स्त्रियाँ। वे घर संभालें, खाना बनाएँ, बर्तन माँजें और बच्चों को पालें। हमें खूबसूरत औरत चाहिए, इंटेलीजेंट औरत नहीं। आगे पढ़ें...

स्पैनिश चित्रकार सल्वाडोर डाली ने अपने समय और समाज की विडंबनाअों और विद्रूपताअों के साथ ही अपने भीतर के संसार के स्वप्न, आकांक्षाअों और विशाद को बहुत ही कलात्मक कौशल के साथ चित्रित किया है। आगे पढ़ें...

अब स्त्री बदल रही है। वह अपने मन और देह को पहले से बेहतर जान-समझ रही है। उसका अपनी देह और अंतरमन से एक ज्यादा आजाद संबंध बन रहा है। और मैं इसे उसके रिटर्न फोर्स के रूप में देखता हूं। आगे पढ़ें...

प्रेरणा के लिए मैं सपनों को बहुत महत्व देता हूं लेकिन बाद मैंने महसूस किया कि जीवन खुद प्रेरणा के लिए एक महान स्रोत है और सपना उसका बहुत ही छोटा-सा हिस्सा। लेखन के बारे में यह बात बिलकुल सच है कि मैं सपनों की विभिन्न धारणाअों और उनकी व्याख्याअों में बहुत दिलचस्पी रखता हूं और इन्हें जीवन का हिस्सा मानता हूं लेकिन यथार्थ उससे कहीं अधिक बड़ी चीज है। मेरे स्वप्न शायद बहुत अच्छे नहीं होते। आगे पढ़ें...