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5 अप्रैल, 2008


ब्लॉग्स (2)
अब स्त्री बदल रही है। वह अपने मन और देह को पहले से बेहतर जान-समझ रही है। उसका अपनी देह और अंतरमन से एक ज्यादा आजाद संबंध बन रहा है। और मैं इसे उसके रिटर्न फोर्स के रूप में देखता हूं। आगे पढ़ें...

प्रेरणा के लिए मैं सपनों को बहुत महत्व देता हूं लेकिन बाद मैंने महसूस किया कि जीवन खुद प्रेरणा के लिए एक महान स्रोत है और सपना उसका बहुत ही छोटा-सा हिस्सा। लेखन के बारे में यह बात बिलकुल सच है कि मैं सपनों की विभिन्न धारणाअों और उनकी व्याख्याअों में बहुत दिलचस्पी रखता हूं और इन्हें जीवन का हिस्सा मानता हूं लेकिन यथार्थ उससे कहीं अधिक बड़ी चीज है। मेरे स्वप्न शायद बहुत अच्छे नहीं होते। आगे पढ़ें...