जीवन खुद प्रेरणा का बडा स्रोत है
गाबो यानी गैब्रियल गार्सिया मार्केज। वन हंड्रेड ईयर्स आफ सॉलिट्यूड के लेखक। उनके पास एक जादुई कलम है जिसके चलाते ही जादुई यथार्थवाद की कई कहानियां दुनिया के लगभग हर कोने में बिखरकर सब को सम्मोहित कर रही हैं।
कोलंबिया का यह महान उपन्यासकार अस्सी साल का हो चुका है और उसकी रचनात्मकता में किसी तरह की थकान के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। उनकी किताब मेमोरीज आफ माय मेलनकली व्होर्स ने पाठकों को उसी तरह से मोहित किया है जैसी इसके पहले की कृतियों ने। वे छह मार्च १९२८ को कोलंबिया के एक छोटे से शहर अराकाटका में पैदा हुए जहां केले बहुतायत में होते हैं। वे अपने माता-पिता की १२वीं संतानों में सबसे बड़े हैं। उनकी मां एक हाई स्कूल में पियानो बजाती थी और पिता इतने गरीब थे कि अपनी मेडिकल की पढ़ाई नहीं कर सके और टेलिग्राफर बन गए। हालांकि मार्केज ने बोर्डिंग स्कूल में स्कॉलरशिप हासिल की और बागोटा की नेशनल यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री हासिल की। अपने मार्क्सवादी प्रोफेसर का उनका पर गहरा प्रभाव पड़ा और वे एक रेडिकल सोशलिस्ट हो गए। राजनीतिक अराजकता के कारण बागोटा यूनिवर्सिटी १९४८ में बंद हो गई। तब तक उन्होंने कहानियां लिखना शुरू कर दिया था। ये कहानियां अखबार अल स्पेक्तादोर में प्रकाशित होती रहीं। बाद में एक ख्यात पत्रकार बन गए। उनकी पहली किताब लीफ स्टार्म है जिसे प्रकाशक मिलने में सात साल लग गए। इस बीच उन्होंने अपने बचपन की साथी मार्सेडीज बार्चा से शादी की। उनके दो बेटे रोड्रिगो और गोंजाल्वो हैं।
जनवरी १९६५ में उन्होंने अपना नया उपन्यास लिखना शुरू किया और इसे पूरा करने के लिए उन्होंने रोज आठ से दस घंटे तक अठारह महिनों तक लगातार लिखा। १९६९ में यह उपन्यास वन हंड्रेड ईयर्स आफ सॉलिट्यूड शीर्षक से प्रकाशित हुआ। तब साहित्य की दुनिया में उनकी अनूठी शैली ने जादुई यथार्थवाद को स्थापित किया और वे विश्वविख्यात हो गए। इस उपन्यास के जरिये उन्होंने पूरी दुनिया में लेटिन अमेरिकी साहित्य को प्रतिष्ठा दिलाई और यह उपन्यास बेस्ट सेलर साबित हुआ और मास्टर पीस कहा गया। १९८२ में उन्हें इस उपन्यास के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
एक साक्षात्कार में वे कहते हैं मेरे लिखने की शुरुआत ड्राइंग से हुई बल्कि कार्टून से। घर में कुछ भी लिखने या पढ़ने से पहले मैं कॉमिक्स बनाया करता था। मजेदार बात तो यह है कि और जिसे मैं आज तक महसूस करता हूं कि हाई स्कूल में एक लेखक के रूप में मेरी ख्याति थी जबकि तब सचमुच मैंने कुछ भई नहीं लिखा था। यदि कोई पम्फ्लेट, लेटर या पिटीशन लिखना होती तो यह काम मुझे दिया जाता क्योंकि एसा माना जाता था यह काम मैं कर सकता हूं क्योंकि मैं लेखक हूं। जब मैंने कॉलेज में दाखिला लिया तो सामान्यतः मै एक अच्छी साहित्यिक पृष्ठभूमि का माना जाता था और अपने दोस्तों के मुकाबले मुझे औसत से कुछ ज्यादा समझा जाता था। बागोटा यूनिवर्सिटी में मैंने नए दोस्त बनाए जिन्होंने मुझे समकालीन रचनाकारों से मिलवाया। उन्हीं दिनों मेरे एक दोस्त ने एक रात मुझे फ्रांस काफ्का की कहानियों की किताब दी। मैंने कहानी मेटामार्फासिस पढ़ना शुरू की। उसकी पहली ही पंक्ति ने मुझे लगभग झिंझोड़ दिया। मैं चमत्कृत था। वह पहली पंक्ति थी- एक दुःस्वप्न देखने के बाद जब ग्रेगोर सम्सा अपने बिस्तर से उठा तो उसने देखा वह एक भीमकाय कंसारे (कॉकरोच) में बदल गया है... और जब मैंने यह पंक्ति पढ़ी तो मैं सोचने लगा कि मैं नहीं जानता कि इस तरह लिखने की इजाजत किसी औऱ को भी थी।
मैं काफी समय से लिख रहा था और तब मैंने तुरंत कहानियां लिखना शुरू किया। वे पूरी तरह इंटेलेक्चुअल कहानियां थीं क्योंकि मैंने उन्हें अपने साहित्यिक अनुभवों के आधार पर लिखा था और तब तक मैं साहित्य और जीवन के बीच कोई संगति नहीं देख पा रहा था। मेरी वे कहानियां बागोटा के एक अखबार अल स्पेक्तोदोर के साहित्यिक परिशिष्टों में छपती थीं। एक हद तक उन्हें पसंद किया गया था, संभवतः इसलिए क्योंकि तब कोलंबिया में कोई भी इंटेलेक्चुअल कहानियां नहीं लिख रहा था। इन कहानियों में अधिकांशतः कंट्रीसाइड और सामाजिक जीवन के बारे में लिखा गया था। उन कहानियों के बारे में कहा गया था कि इन पर जॉयस का असर है।
तब तक मैंने जेम्स जॉयस को नहीं पढ़ा था। इसलिए यूलिसिस पढ़ना शुरू किया। तब मैंने उसका उपलब्ध स्पेनिश संस्करण पढ़ा था। अंग्रेजी और फ्रेंच में यूलिसिस का बहुत अच्छा अनुवाद पढ़ने के बाद मैंने जाना कि मूल स्पेनिश अनुवाद बहुत खराब था लेकिन मैंने उससे बहुत सीखा, विशेषकर उसके इंटीरियर मोनोलॉग की तकनीक जो भविष्य में मेरे लेखन में बहुत काम आई। बाद मैंने इसे वर्जीनिया वुल्फ में पाया, मुझे उनके इस्तेमाल का तरीका पसंद आया जो जॉयस के मुकाबले बेहतर था। हालांकि बाद में मैंने जाना कि इस इंटीरियर मोनोलॉग को जिसने खोजा था वे थे-लाजारिलो डि टारमेस।
प्रेरणा के लिए मैं सपनों को बहुत महत्व देता हूं लेकिन बाद मैंने महसूस किया कि जीवन खुद प्रेरणा के लिए एक महान स्रोत है और सपना उसका बहुत ही छोटा-सा हिस्सा। लेखन के बारे में यह बात बिलकुल सच है कि मैं सपनों की विभिन्न धारणाअों और उनकी व्याख्याअों में बहुत दिलचस्पी रखता हूं और इन्हें जीवन का हिस्सा मानता हूं लेकिन यथार्थ उससे कहीं अधिक बड़ी चीज है। मेरे स्वप्न शायद बहुत अच्छे नहीं होते।
प्रमुख कृतियां ः
लीफ स्टार्म, वन हंड्रेड ईअर्स आफ सॉलिट्यूड, नो वन राइट टु कलोनियल, स्ट्रेंज पिलग्रीम्स, क्रॉनिकल टेल आफ ए डेथ फोरटोल्ड, द आटम आफ द पैट्रिआर्च, इन इविल अवर, लव इन द टाइम्स आफ कॉलेरा, आफ लव एंड अदर डिमांस, जनरल इन हिज लेबरिंथ, नोट्स आफ ए किडनैपिंग, फ्रेगरेंस आफ गुआवा, लिविंग टु टेल द टेल, मेमॉयर्स आफ माय मेलनकली व्होर्स।
प्रस्तुति ः रवींद्र व्यास
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