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30 अप्रैल, 2008


ब्लॉग्स (1)
मैं आशुतोष की कविताओं पर शुरुआत से ही फिदा रहा हूं। इसलिए नहीं कि वह दोस्त है बल्कि इसलिए कि हिंदी की ढेर औसत दर्जे की कविताअों के बीच उसकी कविताएं यह गहरी आश्वस्ति देती हैं कि अच्छे कवियों का पुनर्जन्म होता रहता है। उसकी कविताएं गहरे अवसाद के रेशों से बने और बुने गए झीने पर्दे की कविताएं हैं जिसमें करूणा का जल एक अोझल होती नदी की तरह दूर से झिममिलाता रहता है। आगे पढ़ें...