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समय के आंगन में एक तितली
बरसों पहले इंदौर के एक टॉकीज के चुभते पटियों पर बैठकर मैंने मर्लिन मुनरो की फिल्म देखी थी औऱ मेरा यकीन करिये की उसकी जान लेवा अदाअों और बला की खूबसूरती को टकटकी बांधे देखते हुए मैं किसी बादल पर सवार था।
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Ravindra Vyas
द्वारा 30 मई, 2008 3:37 PM पर पोस्टेड
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सातवीं सीढ़ी और पीले फूल
उसने महसूस किया उसके सीने के बाईं अोर कहीं उस चुन्नी का पीला रंग छूट गया है जो धडकनों के साथ मिलकर छोटे-छोटे पीले फूलों में खिल गया है।
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Ravindra Vyas
द्वारा 23 मई, 2008 2:48 PM पर पोस्टेड
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मैंने नंगी आंखों से जीवन की जघन्यता को देखा है
यदि इन सचाइयों से भागना ही आपके लिए जीना है तो फिर आप सच को कभी नहीं देख पाएंगे...
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Ravindra Vyas
द्वारा 20 मई, 2008 11:25 AM पर पोस्टेड
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आज मेरे प्रिय कवि मंगलेश डबराल का जन्मदिन है
उसकी कमीज पर शहर की रगड़ के निशान देखे हैं और उसी कमीज पर पहाड़ की छुअन का थोड़ा सा हरापन,
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Ravindra Vyas
द्वारा 16 मई, 2008 12:48 PM पर पोस्टेड
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तमाम शोखी, तमाम बिजली, तमाम मस्ती, तमाम जादू
उनके नाजुक खयालों और जज्बात की तितली आपके दिल पर हौले से बैठकर ऐसे उड़ जाती है कि उसके रोशन-रंगीन रंग हमेशा के लिए आपके दिलो-दिमाग में जगमगाते रहते हैं औऱ अपनी खूशबू से महकाए रहते हैं।
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Ravindra Vyas
द्वारा 12 मई, 2008 12:45 PM पर पोस्टेड
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अब वे अपने विश्व में रहते हैं
हुसैन आज भी अनेक युवा चित्रकारों से ज्यादा चित्र बनाते हैं। बेचने के लिए नहीं बल्कि अपनी रचनात्मक ऊर्जा को सहेजते-संवारते हुए।
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Ravindra Vyas
द्वारा 10 मई, 2008 1:17 PM पर पोस्टेड
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रोज घर से निकलो और रोज घर पहुंच जाअो बच्चों
दोस्तों, मैं नहीं जानता ईश्वर है कि नहीं, लेकिन मैं हमेशा प्रार्थना करता रहूंगा उन तमाम बच्चों के लिए जो किसी भी काम से किसी भी कारण अपने घर से निकलते हैं वे वापस अपने घर लौट आएं।
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Ravindra Vyas
द्वारा 8 मई, 2008 12:30 PM पर पोस्टेड
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किशन महाराज और तबले पर कुछ नोट्स
किशन महाराज का तबला इन सबसे विशिष्ट हुआ तो इसलिए कि अपनी निजता की रक्षा करता हुआ वह ज्यादा सामाजिक हुआ।
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Ravindra Vyas
द्वारा 6 मई, 2008 2:19 PM पर पोस्टेड
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जिंदगी से बेदखल पसीने की गंध
...और आज खुशबू का करोड़ों का कारोबार है, जिंदगी से पसीने की गंध को बेदखल करता हुआ।
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Ravindra Vyas
द्वारा 3 मई, 2008 5:14 PM पर पोस्टेड
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मैं आज गिलहरी के मरने की खबर बनाता हूं
जो चीयर लीडर्स के हिलते नितंबों पर फिदा हैं उन्हें वे मुबारक, मैं आज गिलहरी के कुचलकर मर जाने को खबर बनाता हूं।
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Ravindra Vyas
द्वारा 1 मई, 2008 11:32 AM पर पोस्टेड
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