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मई 2008


ब्लॉग्स (10)
बरसों पहले इंदौर के एक टॉकीज के चुभते पटियों पर बैठकर मैंने मर्लिन मुनरो की फिल्म देखी थी औऱ मेरा यकीन करिये की उसकी जान लेवा अदाअों और बला की खूबसूरती को टकटकी बांधे देखते हुए मैं किसी बादल पर सवार था। आगे पढ़ें...

उसने महसूस किया उसके सीने के बाईं अोर कहीं उस चुन्नी का पीला रंग छूट गया है जो धडकनों के साथ मिलकर छोटे-छोटे पीले फूलों में खिल गया है। आगे पढ़ें...

यदि इन सचाइयों से भागना ही आपके लिए जीना है तो फिर आप सच को कभी नहीं देख पाएंगे... आगे पढ़ें...

उसकी कमीज पर शहर की रगड़ के निशान देखे हैं और उसी कमीज पर पहाड़ की छुअन का थोड़ा सा हरापन, आगे पढ़ें...

उनके नाजुक खयालों और जज्बात की तितली आपके दिल पर हौले से बैठकर ऐसे उड़ जाती है कि उसके रोशन-रंगीन रंग हमेशा के लिए आपके दिलो-दिमाग में जगमगाते रहते हैं औऱ अपनी खूशबू से महकाए रहते हैं। आगे पढ़ें...

हुसैन आज भी अनेक युवा चित्रकारों से ज्यादा चित्र बनाते हैं। बेचने के लिए नहीं बल्कि अपनी रचनात्मक ऊर्जा को सहेजते-संवारते हुए। आगे पढ़ें...

दोस्तों, मैं नहीं जानता ईश्वर है कि नहीं, लेकिन मैं हमेशा प्रार्थना करता रहूंगा उन तमाम बच्चों के लिए जो किसी भी काम से किसी भी कारण अपने घर से निकलते हैं वे वापस अपने घर लौट आएं। आगे पढ़ें...

किशन महाराज का तबला इन सबसे विशिष्ट हुआ तो इसलिए कि अपनी निजता की रक्षा करता हुआ वह ज्यादा सामाजिक हुआ। आगे पढ़ें...

...और आज खुशबू का करोड़ों का कारोबार है, जिंदगी से पसीने की गंध को बेदखल करता हुआ। आगे पढ़ें...

जो चीयर लीडर्स के हिलते नितंबों पर फिदा हैं उन्हें वे मुबारक, मैं आज गिलहरी के कुचलकर मर जाने को खबर बनाता हूं। आगे पढ़ें...