सुबह की खिली और नर्म धूप में उस सड़क पर घूमना किसी दहशत और आंतक से रूबरू होना है। शहर के आखिर में बनी एक नई कॉलोनी में जहां मैं रहता हूं, वहां एक चिकनी सड़क बन गई है जो तीन-चार किलोमीटर दूर इस इलाके को एबी रोड से जोड़ती है। मेरे घर के सामने सिर्फ एक प्लॉट छोड़कर ही अब भी खेतों में फसलें लहलहाती हैं और बारिश में पेड़ नाचते हुए अपने भरे-पूरे हरेपन में इतराते रहते हैं। इनमें पांच गुलमोहर के पेड़ भी हैं और भरी दोपहर में इनकी नाजुक-लचकती बांहों पर अंगारे की तरह फूलों के गुच्छे हवा में झूलते रहते हैं। मैं इन्हें जब भी देखता हूं मुझे राहत और हिम्मत भी मिलती है। इन पेड़ों में कुछ की लचकती शाखें काट डाली गई हैं क्योंकि वे आते-जाते वाहनों की गति में आड़े आती थीं। खेतों के पीछे जो खेत हैं, सुना है वे बिक चुके हैं और वहां एक बड़ा मॉल बनने की तैयारी है।
मैं डायबिटीक हूं और मेरे डॉक्टर ने कहा है कि आप अपनी ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं कर पाएंगे तो आपको इंसुलिन लेना पड़ेगी। तो मैं रोज चार किलोमीटर पैदल घूमता हूं। तो सुबह की खिली और नर्म धूप में जब इस सड़क पर चलता हूं तो रोज मेरा मौत से सामना होता है। इस सड़क पर किसी सुबह कोई चूहा मरा मिलता है, तो किसी सुबह गिरगिट। किसी सुबह बिल्ली मरी मिलती है। आज सुबह एक कुचली हुई, मरी हुई गिलहरी मिली। ये सब पानी के टैंकरों (जिनमें तालाबों और नदियों का पानी है) औऱ ट्रकों(जिनमें सूख चुकी नदियों की रेत भरी है), नई चमचमाती कारों, ट्रेक्टरों, स्कूल और कॉलेज की बसों से कुचले जाकर मारे जा रहे हैं।
मैं बारिश का बेसब्री से इंतजार करता हूं। बारिश में ही मुझे पहली बार एक लड़की से प्रेम हुआ, बारिश में ही मैंने उसे पहली बार चूमा, बारिश में ही वह मुझसे बिछड़ी, बारिश में ही मुझे बेहतरीन दोस्त मिले और बारिश में ही उन्होंने दूसरे शहर जाते हुए मुझसे विदा ली, बारिश में ही मैंने अपनी पहली कहानी बारिश पर ही लिखी। बारिश बारिश बारिश...मैं मई में भी होता हूं तो मुझे जुलाई-अगस्त की रिमझिम सुनाई देती है। लेकिन कुचले गए इन प्यारे जीवों को इस सड़क पर मरा पाता हूं तो पहली बार बारिश का इंतजार एक दहशत में बदल जाता है। मैं जानता हूं जुलाई की किसी भीगी सुबह मुझे मेंढ़क मरे हुए मिलेंगे। विकास के नाम बनी एक सड़क के लिए किन किन को अपनी कुर्बानियां देना पड़ रही है। और इनकी किसी अखबार, किसी रेडियो, किसी टीवी में कहीं कोई खबर नहीं छपती। जो चीयर लीडर्स के हिलते नितंबों पर फिदा हैं उन्हें वे मुबाकर, मैं गिलहरी के कुचलकर मर जाने को खबर बनाता हूं।
मेरे घर के सामने तो सिर्फ सड़क ही बनी ही है, जहां बांध बन रहे हैं वहां कितने हजारों लोगों को अपना जीवन कुर्बान करना पड़ रहा होगा, कितने कीट-पतंगों और जीव-जंतुअों को, कितने पेड़ों और पौधों को, कितने बीजों और फूलों को, और कितनी तितलियों को....
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