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सातवीं सीढ़ी और पीले फूल

अजगर को समर्पित करते हुए...

वे कॉलेज के चमकीले दिन थे और हमेशा की तरह वह सीढि़यां गिनते हुए चढ़ रहा था। जब वह सातवीं सीढ़ी पर था, एक लड़की उसके पास से बहुत तेजी से उतरी। बेफिक्र औऱ बेपरवाह। उसकी पीली चुन्नी उसे छूते हुए निकल गई। वह उसी सीढ़ी पर थोड़ी देर के लिए खड़ा रह गया, अवाक। उसने महसूस किया उसके सीने के बाईं अोर कहीं उस चुन्नी का पीला रंग छूट गया है जो धडकनों के साथ मिलकर छोटे-छोटे पीले फूलों में खिल गया है। उसने एक गहरी सांस ली और पाया कि सांसों में खुशबू बसी है। उस लड़के को पहली बार यकीन हुआ कि दुनिया में जादू भी होते हैं।
उसे ध्यान आया कि वह उस लड़की का चेहरा नहीं देख पाया। यही सोचकर वह पलटा तो उसने देखा वहां एक खाली और सूना गलियारा है औऱ सन्नाटा पसरा हुआ है। सातवीं सीढ़ी पर खड़ा होकर वह सोचने लगा कि उसी लड़की के साथ सात जनम की कसमें खाएगा, सात फेरे लेगा और कभी भी उससे सात समंदर दूर नहीं जाएगा।
उसके दिन बदल गए। उसकी शामें बदल गईं। उसकी रातें बदल गईं। उसकी करवटें औऱ सलवटें बदल गईं। उसकी धड़कनें और सांसें बदल गईं। फिर उसकी आदतें बदल गईं। वह एक नई और अजीब-सी आदत का शिकार हो गया। वह उसके पास से गुजरने वाली हर लड़की को बहुत ध्यान से देखता। औऱ उस लड़की को तो वह बहुत ही ध्यान से देखता जिसने पीली चुन्नी डाल रखी हो। जब भी कोई लड़की उसके पास से गुजरती वह रुककर गहरी सांस लेने लगता। इस आदत की वजह से कई बार कई लड़कियां उसे संदेह की निगाह से देखतीं। कुछ बिचकतीं, कुछ सहमतीं। कुछ रास्ता बदल लेतीं।
मौसम बदलते हैं। रिमझिम बारिश होती है, गुलाबी ठंड पड़ती है और बसंत आता है औऱ पीले फूल खिलते हैं।
एक दिन ऐसा आता है कि वह उसकी क्लास की ही एक लड़की की शादी में अपने दोस्तों के साथ जाता है और लडकी को शादी की बधाई देते हुए हाथ मिलाता है तो सीने के बाईं अोर एक पीला रंग और पीला होकर चमकने लगता है और धड़कनों के साथ घुममिल कर छोटे छोटे पीले फूलों में खिल गया जाता है। वह उस लड़की के पास थोड़ी देर खड़ा रहता है फोटो खींचवाता हुआ और गहरी सांस लेता है तो पाता है कि उसकी सांसों में खूशबू बसी है और वह अपने कॉलेज की उसी सातवीं सीढ़ी पर खड़ा है, अवाक, जहां एक लड़की की चुन्नी का पीला रंग उसके दिल पर छूट गया था।
चारों तरफ चहल-पहल है, लोग एकदूसरे हंसते-खिलखिलाते मिल रहे हैं, संगीत बज रहा
है।
लेकिन वह लड़का सातवीं सीढ़ी पर खड़ा होकर फिर से सोचना चाहता है कि वह उसी लड़की के साथ सात जनमों की कसमें खाएगा, सात फेरे लेगा और उससे कभी भी सात समंदर दूर नहीं जाएगा...

प्रतिक्रियाएँ

Re: सातवीं सीढ़ी और पीले फूल
पीले फूल बसंत का प्रतीक होते है और बसंत में ही प्रेमियों के ह्र्दय में हूक उठती है, आपने तो मई में बसंत का एहसास करा दिया है|
Re: सातवीं सीढ़ी और पीले फूल
लगता है गीत वाली जडी-बूटी तुम्हारे हाथ लग गई है. खूब जादू दिखा रहे हो.
Re: सातवीं सीढ़ी और पीले फूल
अरुणजी और संदीपजी धन्यवाद। अरुणजी जड़ी-बूटी ही समझिए क्योंकि हमारे मन में कहीं गहरे ये ही जड़ी-बूटियां बची-खुची रह गई हैं जो हमें गाहे-बगाहे अपनी खुशबू से महकाए रहती है।
Re: सातवीं सीढ़ी और पीले फूल
रविंद्र जी, पीले फूल को पढ़ा। इसे पढ़ना सुंदर-सा अहसास है। पीला रंग मेरी सोच का पतझड़ भी है और प्रेम? बसंत? न मालूम क्यों जब ख्वाब टूटते है तो हम स्वयं को सातवीं सीढ़ीं पर ही खड़ा हुआ पाते है।
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