चंद्रकांत देवतालेजी की एक और कविता, आप सबके लिए। यह कविता उनके जल्द ही प्रकाशित होने वाले कविता संग्रह में संग्रहित है। तुम्हारी हथेलियों पर बरसों से दुखने का अभिनय करते मेरे कंधों और पीठ को सहलाती तुम्हारी हथेलियों पर मैंने क्या रखा? अगर इस तरह सोचने ...
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