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18 जून, 2008


ब्लॉग्स (2)
मै जब भी पानी से भरे बादलों को देखता हूं तो उस पिता की याद आती है जो अभी-अभी अपनी लाड़ली बेटी को विदा करके अपने सूने हो चुके घर के एक वारीन से कोने में अकेला खड़ा है। यह पिता एक बार फिर अपनी बेटी के लिए एक हाथी या एक घोड़ा बनना चाहता है जिस पर बैठकर उसकी ... आगे पढ़ें...

मैं जब भी पानी से भरे बादलों को देखता हूं तो उस पिता की याद आती है जो अभी-अभी अपनी लाड़ली बेटी को विदा करके अपने सूने हो चुके घर के एक वारीन से कोने में अकेला खड़ा है। यह पिता एक बार फिर अपनी बेटी के लिए एक हाथी या एक घोड़ा बनना चाहता है जिस पर बैठकर उसकी ... आगे पढ़ें...