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जुलाई 2008


ब्लॉग्स (1)
परसों रात यानी 24 जुलाई को देवतालेजी का फोन आया। उन्होंने कहा मैं दो-तीन दिन से इंदौर में हूं। कल सुबह मिल सकते हो, सुबह नौ बजे। साढ़े नौ-पौने दस बजे तक मैं निकल जाऊंगा। साथ में मार्केज की वह किताब भी ले आना। दूसरे दिन सुबह नौ बजे मैं उनके घर था, मार्केज ... आगे पढ़ें...