Webdunia: Portal - Search - Mail - Greetings   More >>
Support | Font Download | Feedback
Search  
Welcome, Guest  [ Register | Sign In ]

बारिश में विदा


आज सुबह से बारिश विलंबित खयाल में थी। कभी द्रुत भी लेकिन देर तक विलंबित।
बादल एक लय में तैर रहे हैं। पानी से भरे हुए। जहां मन होता है, बसरते हैं।
पेड़ एक पैर पर खड़े होकर नाचते हैं। एक पेड़ किसी खयाल में खड़ा भीग रहा है। चुपचाप। लगता है, किसी इंतजार में है। कोई उसे छोड़कर चला गया है।
उसकी स्मृति में पंखों की फड़फड़ाहट है।
पेड़ के सीने में एक लड़की की हिचकियां हैं जो कभी उससे पीठ टिकाए बैठी थी। पेड़ ने एक बजुर्ग के हांफने की आवाज को थाम रखा है। वह धीरे-धीरे हिलता हुए हवा करता था ताकि उसके नीचे खड़े आदमी का पसीना सूख सके। उसके पीछे हमेशा कोई न कोई छिप जाता था।
वह पेड़ अपने बदन पर किसी अंगुलियों के पोरों से लिखे नाम को अब भी तितली की तरह महसूस करता है। उसकी पत्तियों पर उन प्रेमियों की फुसफुसहट पानी की बूंदों की तरह अब भी ताजा हैं जो पहाड पर दौड़कर चढ़े और कुछ देर के लिए अोझल हो गए थे। वे लौटे तो उन्होंने पहाड़ को अपने चेहरे के साथ नदी की देह पर हिलते हुए देखा था। नदी का वह हरा पानी अब भी हिल रहा है।
वह पेड़ अब भी अपने में कुछ फूल छिपाए बैठा है। वह जानता है एक बूढ़ी आएगी और उसकी डाल को नीचा कर कुछ फूल अपनी झोली में ले जाएगी।
वह बूढ़ी विदा ले चुकी है और बारिश में उस पेड़ के फूल टूटकर झरते रहते हैं। वह झरते हुए फूलों को देखकर इस बात से बेखबर है कि वह बूढ़ी अब कभी उसके पास नहीं लौटेगी। ध्यान से सुनें तो आपको इस पेड़ के सुबकने की आवाज भी सुनाई देगी।
अब वह बहुत सारी स्मृतियों को धारे बारिश में खड़ा है। चुपचाप। भीगता हुआ।
बहुत सारे लोग उससे विदा ले चुके हैं। वह अकेला खड़ा है।
ये बारिश पीछा नहीं छोड़ती। बारिश में बारिश कभी अकेली नहीं आती। दूसरी बारिशों की बारिश भी साथ लेकर आती है। किसी न किसी बारिश में कोई न कोई उससे विदा लेता रहा है। वह भी बारिश का कोई एक दिन था, जब कोई उससे विदा ले चुका था।
वह भी एक दिन इसी मौसम में सबसे विदा लेगा। वह ऐसा सोचता है तो एक डाली कांपने लगती है। नदी की देह पर पहाड़ कांपता है। पहाड़ के सीने में वे पत्थर कांपते हैं, जिसमें हरी नदी का संगीत अब भी गुनगुनाता है।
जब अंतिम विदा की बेला आएगी
तब बारिश हो रही होगी
बारिश उसके सिरहाने टहलने आएगी और
उसे अविचल पड़ा देख कुछ देर थमेगी
दूर जाकर उस पहाड़ के पीछे गुम होना चाहेगी
लेकिन अचानक पलटकर तेज बरसती हुई
उसी पेड़ में छिपने की कोशिश करेगी
उस झुरमुट में अब भी कुछ सफेद फूल होंगे
बारिश की मार झेलते हुए
उस बूढ़ी की प्रतीक्षा में भीगते हुए चुपचाप।

प्रतिक्रियाएँ

Re: बारिश में विदा
just beautiful.....bahut hi khoobsurat likhte hain aap.
Re: बारिश में विदा
आप जैसे अच्छे लोगों और कद्रदानों के बिना सब कुछ उजाड़ है। आप जैसे लोग हैं, तो यह सुंदरता बची रहेगी। आपके भीतर अंदर का हरापन कभी सूखे नहीं, वह हमेशा हरा-भरा रहे, इन्हीं शुभकामनाअों के साथ शुक्रिया।
Re: बारिश में विदा
खूबसूरत , अद्वितीय , इतने महकते शब्द फूल ना जाने कौन सी बगिया से लेकर आते हैं । बधाई फिर एक बार इतने जीवंत लेखन के लिए ..... स्मृति
Re: बारिश में विदा
स्मृतिजी, जीवन की इतनी स्मृतियां हैं कि उन्हीं में कहीं अोस की तरह टपकते रहते हैं। आप संवेदनशील हैं, इसलिए इतना सब कुछ महसूस करती हैं। यह हम सब के लिए, इस समाज के लिए और इस पूरी दुनिया के लिए इस प्यारी दुनिया के लिए जरूरी भी है। आपके प्रति गहरा आभार प्रकट करता हूं।
Re: बारिश में विदा
तक़रीबन इसी ढब में आपने बादलों की बारहखड़ी लिखी थी. यहाँ भी बारिश और पेड़ इस तरह एक थरथराती हुई-सी लय में एक हैं कि 'पानी का पेड़ है बारिश' जैसा कुछ-कुछ याद आने लगता है. लेकिन यहाँ पत्‍थर भी हैं और नदी भी, जिसकी देह पर पहाड़ कांपता है. आप डिस्क्रिप्‍शन को कि़स्‍साग़ोई की मानिंद बखानते हैं और धीरे-धीरे उसकी सरहदें एक ख़ास तरह की जादुई धुंध में गुमते हुए चीज़ों की सादृश्‍यता में बिला जाती हैं- एक अदृश्‍य पुल-सा बुनते हुए. आप दृश्‍य से मिथक बोध में भी जाते हैं- स्‍मृतियों के तहख़ाने के भीतर- और यहां भी आप एकाध जगह डिविएट किए हैं, ख़ुद को दोहराए भी हैं, लेकिन प्रांजल गद्य और कल्‍पनाशील कहन इस सब को ढांप जाते हैं. 'बारिश में बारिश कभी अकेले नहीं आती' लिरिकल हाइट्स की पंक्ति है- लोर्का, या पर्सी शेली! ...हल्‍के-पारदर्शी-वायवी रंगों वाली तस्‍वीर मौसम के माकूल है. कूची और कलम चलाते रहियेगा.
Re: बारिश में विदा
प्रिय सुशोभित। तुम मेरे लिखे और चित्रित किए के मर्म तक पहुंचे हो। उतनी ही खूबसूरती के साथ। यह एक नितांत निजी और भावुक किस्म की पोस्ट है। बारिश पर इस ब्लॉग पर तुम जल्द ही कुछ सिरीज जैसा पढ़ पाअोगे, देख पाअोगे। तुमने महमूद दरवेश पर कविताएं लगाई हैं, वह सुंदर काम है। तुम्हे बधाई। और हां, यहां आने का शुक्रिया। आते रहना।
Re: बारिश में विदा
बारिश के कई रंग देखने को मिले। कुछ यादें हमारी भी फिर से हमें भिगो गई।
अस्वीकरण