सुबह जब उठे तो हमें किसी ने नहीं देखा।
फिर एक पेड़ हिला, उस पर चिडि़या बैठी, एक फूल झरा।
एक गाय आई, एक कुत्ता।
इनको भी किसी ने नहीं देखा।
रात की रोटी दूसरे दिन दोपहर तक सूखती रही।
बिल्ली दूध पीकर चली गई।
मैं बारिश में भीगता हूं।
छींकता हूं।
मुझे भी कोई नहीं देखता।
मैंने मां को ढूंढ़ा।
वह जहां सोयी थी वहां बच्चे अकेले हैं।
और हमारे सिरहाने ठंडे पानी की मटकी रखी हुई थी।
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