एक बार जिगर में अंगारा
एक बार गहराती रात कहूंगा
एक बार झिलमिल तारा
एक बार खिलता फूल कहूंगा
एक बार जिगर में अंगारा
एक बार गहराती रात कहूंगा
एक बार झिलमिल तारा
एक बार जागा सपना कहूंगा
एक बार हाथ में लकीर
एक बार धुनी रमाता कहूंगा
एक बार गाता फकीर
एक बार दर दर भटका कहूंगा
एक बार मिला कमंडल
एक बार ये है चिमटा कहूंगा
एक बार अलख निरंजन।
एक बार तुमसे प्रेम कहूंगा
एक बार टपका आंसू
एक बार पहाड़ काटूंगा कहूंगा
एक बार नदी में झांकूं
पेंटिंग ः मार्क शागाल
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कोई जाये सुबह को, कोई जाए शाम