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7 फ़रवरी, 2009


ब्लॉग्स (1)
मेरी आत्मा झाग के थपेड़ों में नहा रही हैमुझे औरत की अंगुलियों के बारे में पता हैये अंगुलियां समुद्र की लहरों से निकलकर आती हैंऔर एक थके-मांदे पस्त आदमी कोहरे-भरे दरख्त में बदल देती हैजिसे तुम त्वचा कहते हो वह नदी का वसंत हैचांदनी में बहता हुआ इच्छाओं का ... आगे पढ़ें...