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8 अप्रैल, 2009


ब्लॉग्स (2)
उनके चित्रों में वे सेमल और पलाश के चटख फूल रूपायित हो रहे हैं जो उन्होंने अपने बचपन में कभी गांव में देखे थे। ये फूल उनके कैनवास पर बोल्ड स्ट्रोक्स और गहरे रंगों में खिलकर लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। यही नहीं उन्होंने बांग्ला लेखिका तस्लीमा नसरीन के ... आगे पढ़ें...

वहां हर चीज सांस ले रही थी। धीमे-धीमे। अपनी ही लय में। पेड़ों पर अपने चमकीले पंख फैलाए धूप खिली रहती थी, उन पर ठहरते और उड़ते पक्षी। खिलते-झरते फूल। पत्तियां, पत्तियों को हौले-हौले उड़ाती हवाएं। और इन सबके बीच सांस लेते कई तरह के कीट-पतंगे। इतना सुंदर ... आगे पढ़ें...