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यहां पानी चांदनी की तरह चमकता है



कुमार अंबुज की कविता
यहां पानी चांदनी की तरह चमकता है
आंधियां चलती हैं और मेरी रेत के ढूह
उड़कर मीलों दूर फिर से बन जाते हैं
यह मेरी अनश्वरता है
यह दिन की चट्टान है जिस पर मैं बैठता हूं
प्रतीक्षा और अंधकार। उम्मीद और पश्चाताप
वासना और दिसंबर। वसंत और धुआं
मैं हर एक के साथ कुछ देर रहता हूं

तारों की तरह टूटते हैं प्रतिज्ञाअों के शब्द
अंतरिक्ष में गुम होते हुए उनकी चमकभर दिखती है।
चंद्रमा को मैं प्रकट करता हूं किसी ब्लैक होल में से
और इस तरह अपने को संसार में से गुजारता हूं

इस संसार में मेरे पास प्रेमजन्य यह शरीर है अलौकिक
इसी में रोज खिलते हैं फूल और यहीं झर जाते हैं
बहती है नीली नदियां और वाष्पित होती हैं
जो मिलती हैं समुद्र में
गिरती हैं फिर बारिश के साथ
यहीं है उतना निर्जन जो जरूरी है सृष्टि के लिए
इसी में कोलाहल है, संगीत है और बिजलियां
पुकार है और चुप्पियां

यहीं है वे पत्थर जिन पर काई जमा होती है
यहीं घेर लेती हैं खुशियां
और एक दिन बुखार में बदल जाती हैं
यह सूर्यास्त की तस्वीर है
देखने वाला इसे सूर्योदय की भी समझ सकता है
प्रेम के वर्तुल हैं सब तरफ
इनका कोई पहला और आखिरी सिरा नहीं
जहां से थाम लो वहीं शुरूआत
जहां छोड़ दो वहीं अंत
रेत की रात के अछोर आकाश में ये तारे
चुंबनों की तरह टिमटिमाते हैं
और आकाशगंगा मादक मद्धिम चीख की तरह
इस छोर से उस छोर तक फैली है

रात के अंतिम पहर में यह किस पक्षी की व्याकुलता है
किस कीड़े की किर्र किर्र चीं चट
हर कोई इसी जनम में अपना प्रेम चाहता है
कई बार तो बिल्कुल अभी, ठीक इसी क्षण
आविष्कृत हैं इसीलिए सारी चेष्टाएं, संकेत और भाषाएं

चारों तरफ चंचल हवा है वानस्पतिक गंध से भरी
प्रेम की स्मृति में ठहरा पानी चांदनी की तरह चमकता है
और प्यास का वर्तमान पसरा है क्षितिज तक
तारों को देखते हुए याद आता है कि जो छूट गया
जो दूर है, अलभ्य है जो, वह भी प्रेम है
दूरी चीजों को नक्षत्रों में बदल देती है।

प्रतिक्रियाएँ

Re: यहां पानी चांदनी की तरह चमकता है
प्रेम के वर्तुल हैं सब तरफ इनका कोई पहला और आखिरी सिरा नहींजहां से थाम लो वहीं शुरूआतजहां छोड़ दो वहीं .......अंत जो दूर है, अलभ्य है जो, वह भी प्रेम हैदूरी चीजों को नक्षत्रों में बदल देती है। .....में क्या कहूं इस कविता औरउपरोक्त इन शब्दों के विषय में ....हमेशा कहना ,सही और सच कितना ...ये भी नही जानती....अम्बुज जी की रचनाएं एक सचेत कवि की अभिव्यक्ति हैं... जहाँ मिथ्या कुछ नही ..बस इसलिए उन में एक सच्चा मानवीय पक्ष देखती हूँ ....आपको और उनको बधाई...
Re: यहां पानी चांदनी की तरह चमकता है
आपका बहुत बहुत शुक्रिया। शुभकामनाएं। बस, इसी तरह आती रहें और पढ़ती रहें।
Re: यहां पानी चांदनी की तरह चमकता है
बढिया रचना प्रेषित की है।आभार।
Re: यहां पानी चांदनी की तरह चमकता है
आपके प्रति आभार प्रकट करता हूं। धन्यवाद।
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