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चैनल: सामयिक


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ब्लॉग्स (21)
आज सुबह से बारिश विलंबित खयाल में थी। कभी द्रुत भी लेकिन देर तक विलंबित।बादल एक लय में तैर रहे हैं। पानी से भरे हुए। जहां मन होता है, बसरते हैं। पेड़ एक पैर पर खड़े होकर नाचते हैं। एक पेड़ किसी खयाल में खड़ा भीग रहा है। चुपचाप। लगता है, किसी इंतजार में ... आगे पढ़ें...

परसों रात यानी 24 जुलाई को देवतालेजी का फोन आया। उन्होंने कहा मैं दो-तीन दिन से इंदौर में हूं। कल सुबह मिल सकते हो, सुबह नौ बजे। साढ़े नौ-पौने दस बजे तक मैं निकल जाऊंगा। साथ में मार्केज की वह किताब भी ले आना। दूसरे दिन सुबह नौ बजे मैं उनके घर था, मार्केज ... आगे पढ़ें...

दुनिया में करोड़ों लोग यूं ही फुटबॉल के दीवाने नहीं हो गए हैं। खिलाड़ी इसके लिए जीते हैं और मरते हैं। आंसू बहाते हैं और सीना फुलाते हैं। जो हारते हैं उन्हें ४० हजार लोगों से भरे खचाखच स्टेडियम में रोने में कतई शर्म नहीं आती क्योंकि वे जानते हैं कि ... आगे पढ़ें...

चंद्रकांत देवतालेजी की एक और कविता, आप सबके लिए। यह कविता उनके जल्द ही प्रकाशित होने वाले कविता संग्रह में संग्रहित है। तुम्हारी हथेलियों पर बरसों से दुखने का अभिनय करते मेरे कंधों और पीठ को सहलाती तुम्हारी हथेलियों पर मैंने क्या रखा? अगर इस तरह सोचने ... आगे पढ़ें...

मै जब भी पानी से भरे बादलों को देखता हूं तो उस पिता की याद आती है जो अभी-अभी अपनी लाड़ली बेटी को विदा करके अपने सूने हो चुके घर के एक वारीन से कोने में अकेला खड़ा है। यह पिता एक बार फिर अपनी बेटी के लिए एक हाथी या एक घोड़ा बनना चाहता है जिस पर बैठकर उसकी ... आगे पढ़ें...

मैं जब भी पानी से भरे बादलों को देखता हूं तो उस पिता की याद आती है जो अभी-अभी अपनी लाड़ली बेटी को विदा करके अपने सूने हो चुके घर के एक वारीन से कोने में अकेला खड़ा है। यह पिता एक बार फिर अपनी बेटी के लिए एक हाथी या एक घोड़ा बनना चाहता है जिस पर बैठकर उसकी ... आगे पढ़ें...

कुमार अंबुज कल इंदौर में थे। भोपाल से इंदौर के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने फोन कर दिया था कि एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आ रहे हैं। तय हुआ कि कार्यक्रम के बाद वे मेरे घर रुकेंगे। वे ठीक पौने नौ बजे मेरे मेरे आफिस आ गए। हम साथ घर आए। थोड़ी देर ... आगे पढ़ें...

रोजाना की तरह आज सुबह घूमकर आया और लगभग सवा आठ बजे चाय पीते हुए अखबार पढ़ रहा था कि फोन की घंटी बज उठी। उधर मेरे प्रिय कवि चंद्रकांत देवतालेजी की आवाज थी। गले में खराश थी और आवाज में थोड़ी-सी हताशा लेकिन मैं खुश था कि वे इंदौर आए हुए हैं। मैंने कहा मैं ... आगे पढ़ें...

उसने महसूस किया उसके सीने के बाईं अोर कहीं उस चुन्नी का पीला रंग छूट गया है जो धडकनों के साथ मिलकर छोटे-छोटे पीले फूलों में खिल गया है। आगे पढ़ें...

यदि इन सचाइयों से भागना ही आपके लिए जीना है तो फिर आप सच को कभी नहीं देख पाएंगे... आगे पढ़ें...

उसकी कमीज पर शहर की रगड़ के निशान देखे हैं और उसी कमीज पर पहाड़ की छुअन का थोड़ा सा हरापन, आगे पढ़ें...

उनके नाजुक खयालों और जज्बात की तितली आपके दिल पर हौले से बैठकर ऐसे उड़ जाती है कि उसके रोशन-रंगीन रंग हमेशा के लिए आपके दिलो-दिमाग में जगमगाते रहते हैं औऱ अपनी खूशबू से महकाए रहते हैं। आगे पढ़ें...

हुसैन आज भी अनेक युवा चित्रकारों से ज्यादा चित्र बनाते हैं। बेचने के लिए नहीं बल्कि अपनी रचनात्मक ऊर्जा को सहेजते-संवारते हुए। आगे पढ़ें...

दोस्तों, मैं नहीं जानता ईश्वर है कि नहीं, लेकिन मैं हमेशा प्रार्थना करता रहूंगा उन तमाम बच्चों के लिए जो किसी भी काम से किसी भी कारण अपने घर से निकलते हैं वे वापस अपने घर लौट आएं। आगे पढ़ें...

किशन महाराज का तबला इन सबसे विशिष्ट हुआ तो इसलिए कि अपनी निजता की रक्षा करता हुआ वह ज्यादा सामाजिक हुआ। आगे पढ़ें...

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