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चैनल: सामयिक


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ब्लॉग्स (30)
जयपुर में मेरे चित्रों की प्रदर्शनी 21 फरवरी से शुरू हो रही है। यह जयपुर जवाहर कला केंद्र की सुरेख कला दीर्घा में आयोजित होगी। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन 21 फरवरी को शाम छह बजे करेंगे हिंदी के ख्यात कवि ऋतुराज जी। 27 फरवरी तक जारी रहने वाली इस प्रदर्शनी में ... आगे पढ़ें...

मुंबई में आतंकवादी हमले के घेरे में सौ से ज्यादा लोगों के मरने की खबरें और इस घेरे में घायलों की गूँजती चीखें इस घेरे का व्यास और मारकता ज्यादा बढ़ाती हैं। इस पागलपन का असर कहाँ तक गया है, इसका अंदाजा शायद राजनीतिज्ञों, अर्थशास्त्रियो, समाजशास्त्रियों, ... आगे पढ़ें...

एक बार खिलता फूल कहूंगाएक बार जिगर में अंगाराएक बार गहराती रात कहूंगाएक बार झिलमिल ताराएक बार खिलता फूल कहूंगाएक बार जिगर में अंगाराएक बार गहराती रात कहूंगाएक बार झिलमिल ताराएक बार जागा सपना कहूंगाएक बार हाथ में लकीर एक बार धुनी रमाता कहूंगा एक बार गाता ... आगे पढ़ें...

वह इससे बेखबर थी। न तारीख पता, न वार, न ये पता था कि दिन था या शाम। या अपने में ही गहराती कोई रात। धूप थी कि छांव। वह सोयी थी या जागी। जीवन में थी या स्वप्न में। पता नहीं, कोई एक खयाल कब उसके पास आकर हौले से बैठ गया। पहली नजर में उसने ध्यान नहीं दिया। जब ... आगे पढ़ें...

उसे पता नहीं था कि वह कब से वहीं खड़ी रह गई है, जहां वह उसे छोड़कर चला गया था। वह पतझड़ के मौसम में खड़ी थी और उसके हाथों में जो छुअन बाकी रह गई थी वह उसके अंदर एक भरे-पूरे वसंत में खिलकर महक रही थी। इसी महकते वसंत की लचकती शाख पर वह अपने प्रेम का अधखिला ... आगे पढ़ें...

सुबह जब उठे तो हमें किसी ने नहीं देखा। फिर एक पेड़ हिला, उस पर चिडि़या बैठी, एक फूल झरा।एक गाय आई, एक कुत्ता।इनको भी किसी ने नहीं देखा।रात की रोटी दूसरे दिन दोपहर तक सूखती रही। बिल्ली दूध पीकर चली गई। मैं बारिश में भीगता हूं। छींकता हूं। मुझे भी कोई नहीं ... आगे पढ़ें...

अपनी कोई महीन बात को कहने के लिए गुलज़ार अक्सर कुदरत का कोई हसीन दृश्य चुनते हैं। कोई दिलकश दृश्य खींचते हैं, बनाते हैं। कोई एक दृश्य जिसमें पहाड़ है, कोहरा है, दरिया है या पेड़ या फिर धुँध में लिपटा कोई ख़ूबसूरत नजारा। उनकी नज्म किसी बिम्ब या दृश्य से ... आगे पढ़ें...

समकालीन हिंदी कविता के महत्वपूर्ण कवि कुमार अंबुज भी ब्लॉगर बन गए हैं। आज ही उन्होंने अपनी एक बेहतरीन पोस्ट डाली है। यह उनके गद्य का एक टुकड़ा है, शहर को देखने की उनकी अपनी नितांत नाजुक निगाह और शैली। इसे पढ़कर यह सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है कि यह एक ... आगे पढ़ें...

मैं गहरी नींद में था, स्वप्न देखता हुआ। उसमें किसी स्त्री के रोने की दबी दबी-सी आवाज थी। बीच-बीच में वह रूदन हिचकी में बदल जाता। टूटती सांसों के बीच रूदन की आवाज गूंजती थी। उसी रूदन से लिपटी हुई एक छोटे बच्चे के रोने की आवाज भी थी। यह रोना इस कदर ... आगे पढ़ें...

आज सुबह से बारिश विलंबित खयाल में थी। कभी द्रुत भी लेकिन देर तक विलंबित।बादल एक लय में तैर रहे हैं। पानी से भरे हुए। जहां मन होता है, बसरते हैं। पेड़ एक पैर पर खड़े होकर नाचते हैं। एक पेड़ किसी खयाल में खड़ा भीग रहा है। चुपचाप। लगता है, किसी इंतजार में ... आगे पढ़ें...

परसों रात यानी 24 जुलाई को देवतालेजी का फोन आया। उन्होंने कहा मैं दो-तीन दिन से इंदौर में हूं। कल सुबह मिल सकते हो, सुबह नौ बजे। साढ़े नौ-पौने दस बजे तक मैं निकल जाऊंगा। साथ में मार्केज की वह किताब भी ले आना। दूसरे दिन सुबह नौ बजे मैं उनके घर था, मार्केज ... आगे पढ़ें...

दुनिया में करोड़ों लोग यूं ही फुटबॉल के दीवाने नहीं हो गए हैं। खिलाड़ी इसके लिए जीते हैं और मरते हैं। आंसू बहाते हैं और सीना फुलाते हैं। जो हारते हैं उन्हें ४० हजार लोगों से भरे खचाखच स्टेडियम में रोने में कतई शर्म नहीं आती क्योंकि वे जानते हैं कि ... आगे पढ़ें...

चंद्रकांत देवतालेजी की एक और कविता, आप सबके लिए। यह कविता उनके जल्द ही प्रकाशित होने वाले कविता संग्रह में संग्रहित है। तुम्हारी हथेलियों पर बरसों से दुखने का अभिनय करते मेरे कंधों और पीठ को सहलाती तुम्हारी हथेलियों पर मैंने क्या रखा? अगर इस तरह सोचने ... आगे पढ़ें...

मै जब भी पानी से भरे बादलों को देखता हूं तो उस पिता की याद आती है जो अभी-अभी अपनी लाड़ली बेटी को विदा करके अपने सूने हो चुके घर के एक वारीन से कोने में अकेला खड़ा है। यह पिता एक बार फिर अपनी बेटी के लिए एक हाथी या एक घोड़ा बनना चाहता है जिस पर बैठकर उसकी ... आगे पढ़ें...

मैं जब भी पानी से भरे बादलों को देखता हूं तो उस पिता की याद आती है जो अभी-अभी अपनी लाड़ली बेटी को विदा करके अपने सूने हो चुके घर के एक वारीन से कोने में अकेला खड़ा है। यह पिता एक बार फिर अपनी बेटी के लिए एक हाथी या एक घोड़ा बनना चाहता है जिस पर बैठकर उसकी ... आगे पढ़ें...

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