कुमार अंबुज कल इंदौर में थे। भोपाल से इंदौर के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने फोन कर दिया था कि एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आ रहे हैं। तय हुआ कि कार्यक्रम के बाद वे मेरे घर रुकेंगे। वे ठीक पौने नौ बजे मेरे मेरे आफिस आ गए। हम साथ घर आए। थोड़ी देर ... आगे पढ़ें...
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रोजाना की तरह आज सुबह घूमकर आया और लगभग सवा आठ बजे चाय पीते हुए अखबार पढ़ रहा था कि फोन की घंटी बज उठी। उधर मेरे प्रिय कवि चंद्रकांत देवतालेजी की आवाज थी। गले में खराश थी और आवाज में थोड़ी-सी हताशा लेकिन मैं खुश था कि वे इंदौर आए हुए हैं। मैंने कहा मैं ... आगे पढ़ें...
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 उसने महसूस किया उसके सीने के बाईं अोर कहीं उस चुन्नी का पीला रंग छूट गया है जो धडकनों के साथ मिलकर छोटे-छोटे पीले फूलों में खिल गया है। आगे पढ़ें...
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 यदि इन सचाइयों से भागना ही आपके लिए जीना है तो फिर आप सच को कभी नहीं देख पाएंगे... आगे पढ़ें...
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उसकी कमीज पर शहर की रगड़ के निशान देखे हैं और उसी कमीज पर पहाड़ की छुअन का थोड़ा सा हरापन, आगे पढ़ें...
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उनके नाजुक खयालों और जज्बात की तितली आपके दिल पर हौले से बैठकर ऐसे उड़ जाती है कि उसके रोशन-रंगीन रंग हमेशा के लिए आपके दिलो-दिमाग में जगमगाते रहते हैं औऱ अपनी खूशबू से महकाए रहते हैं। आगे पढ़ें...
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 हुसैन आज भी अनेक युवा चित्रकारों से ज्यादा चित्र बनाते हैं। बेचने के लिए नहीं बल्कि अपनी रचनात्मक ऊर्जा को सहेजते-संवारते हुए। आगे पढ़ें...
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दोस्तों, मैं नहीं जानता ईश्वर है कि नहीं, लेकिन मैं हमेशा प्रार्थना करता रहूंगा उन तमाम बच्चों के लिए जो किसी भी काम से किसी भी कारण अपने घर से निकलते हैं वे वापस अपने घर लौट आएं। आगे पढ़ें...
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किशन महाराज का तबला इन सबसे विशिष्ट हुआ तो इसलिए कि अपनी निजता की रक्षा करता हुआ वह ज्यादा सामाजिक हुआ। आगे पढ़ें...
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...और आज खुशबू का करोड़ों का कारोबार है, जिंदगी से पसीने की गंध को बेदखल करता हुआ। आगे पढ़ें...
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जो चीयर लीडर्स के हिलते नितंबों पर फिदा हैं उन्हें वे मुबारक, मैं आज गिलहरी के कुचलकर मर जाने को खबर बनाता हूं। आगे पढ़ें...
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मैं आशुतोष की कविताओं पर शुरुआत से ही फिदा रहा हूं। इसलिए नहीं कि वह दोस्त है बल्कि इसलिए कि हिंदी की ढेर औसत दर्जे की कविताअों के बीच उसकी कविताएं यह गहरी आश्वस्ति देती हैं कि अच्छे कवियों का पुनर्जन्म होता रहता है। उसकी कविताएं गहरे अवसाद के रेशों से बने और बुने गए झीने पर्दे की कविताएं हैं जिसमें करूणा का जल एक अोझल होती नदी की तरह दूर से झिममिलाता रहता है। आगे पढ़ें...
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पिछले दिनों पाकिस्तान के नामवर शायर जीशान साहिल गुजर गए। अलग तरह के लबो-लहजे में शायरी करने वाले इस शायर को कराची पर लिखी उसकी नज्मों ने हर सू मशहूर कर दिया। तब उसकी उन नज्मों पर भी लोगों की नजर पड़ी, जिनसे हम-आपके सरोकार भी जुड़े हैं। आगे पढ़ें...
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हमने स्त्रियों का अजीब हाल कर रखा है। हम चाहते हैं सुंदर स्त्रियाँ। वे घर संभालें, खाना बनाएँ, बर्तन माँजें और बच्चों को पालें। हमें खूबसूरत औरत चाहिए, इंटेलीजेंट औरत नहीं। आगे पढ़ें...
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अब स्त्री बदल रही है। वह अपने मन और देह को पहले से बेहतर जान-समझ रही है। उसका अपनी देह और अंतरमन से एक ज्यादा आजाद संबंध बन रहा है। और मैं इसे उसके रिटर्न फोर्स के रूप में देखता हूं। आगे पढ़ें...
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