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ब्लॉग्स (32)
वहां कैनवास पर पत्ते ही पत्ते हैं। झरते हुए, कभी एक साथ और कभी छितराए हुए। हरे-पीले, नारंगी-नीले, काले-भूरे। उजाले में आकर नाचते हुए, उदास हो कर अंधेरे में डूबते हुए। लगता है जैसे हरे-पीले पत्ते जीवन का राग गाते हुए स्वागत कर रहे हों, नारंगी-नीले वसंत के ... आगे पढ़ें...

उनके चित्रों में वे सेमल और पलाश के चटख फूल रूपायित हो रहे हैं जो उन्होंने अपने बचपन में कभी गांव में देखे थे। ये फूल उनके कैनवास पर बोल्ड स्ट्रोक्स और गहरे रंगों में खिलकर लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। यही नहीं उन्होंने बांग्ला लेखिका तस्लीमा नसरीन के ... आगे पढ़ें...

कुमार अंबुज की कवितायहां पानी चांदनी की तरह चमकता हैआंधियां चलती हैं और मेरी रेत के ढूह उड़कर मीलों दूर फिर से बन जाते हैं यह मेरी अनश्वरता है यह दिन की चट्टान है जिस पर मैं बैठता हूंप्रतीक्षा और अंधकार। उम्मीद और पश्चातापवासना और दिसंबर। वसंत और धुआं मैं ... आगे पढ़ें...